आज एक बार फिर हेमंत सरकार के संरक्षित विशेष समुदाय के कुछ मनचलों ने झारखंड की समृद्ध संस्कृति और परंपरा को चुनौती दी है। रांची के पिठौरिया में सरहुल पर्व मना रहे स्थानीय झारखंडवासियों पर हमले की घटना सामने आई है, जो समाज में तनाव और असुरक्षा का कारण बन चुकी है।यह हमला न केवल झारखंडवासियों की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्थाओं पर हमला है, बल्कि यह दर्शाता है कि राज्य सरकार और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।सरहुल, जो झारखंड की प्रमुख सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है, एक पर्व है जिसमें झारखंडवासियों द्वारा अपनी आदिवासी परंपराओं और आस्थाओं का सम्मान किया जाता है।

लेकिन आज इस पर्व के दौरान हिंसा का सामना करना पड़ा, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।झारखंड के नागरिकों और राजनीतिक नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की जा रही है कि वह अविलंब दंगाइयों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हो।समाज में इस घटना से गहरी नाराजगी फैल गई है और लोग सड़कों पर उतर आए हैं, दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।राज्य सरकार और पुलिस को तुरंत इस घटना की उच्चस्तरीय जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। केवल ऐसी कार्रवाई से ही समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखा जा सकता है।झारखंड की संस्कृति और परंपरा का सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य है। इस हमले के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर किस तरह कार्रवाई करती है और राज्य में शांति बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।