चाईबासा के बाल सुधार गृह से बड़ी संख्या में बाल कैदी फरार हो गए हैं, जो कि सुरक्षा व्यवस्था में एक गंभीर चूक को दर्शाता है। यह घटना न केवल राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि सरकार बाल सुधार गृह के उद्देश्य से काफी दूर है।बाल सुधार गृह का उद्देश्य है भटके हुए किशोरों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, लेकिन चाईबासा की यह घटना बताती है कि बाल सुधार गृह का यह उद्देश्य केवल कागजों तक सीमित रह गया है।झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घटना पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस घटना के पीछे की वजह को जानने के लिए उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए और सभी फरार किशोरों को जल्द से जल्द वापस लाकर उनके लिए उचित काउंसलिंग की व्यवस्था करनी चाहिए।यह घटना समाज के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है, क्योंकि ये फरार किशोर समाज में अस्थिरता और अपराध की वजह बन सकते हैं।

लोग इस घटना की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं, और यह सवाल उठा रहे हैं कि बाल सुधार गृह में इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है।इस घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह घटना किसकी लापरवाही का परिणाम है। क्या सुरक्षा की व्यवस्था में कोई कमी रही या फिर किसी और कारण से यह घटना हुई?चाईबासा की यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह बच्चों की भलाई के लिए किए गए प्रयासों पर भी प्रश्न चिन्ह लगा रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कैसे कार्रवाई करती है।