क्या चंद्रमा पर खनन संभव है? इस दशक के अंत तक क्या विभिन्न देश और निजी कंपनियाँ चंद्रमा की सतह पर खनन कार्य कर रही होंगी? आइए जानते हैं इस मुद्दे के बारे में! चंद्रमा पर खनन की अवधारणा अब एक वास्तविकता बनती दिख रही है। नासा का अरबों डॉलर का ‘आर्टेमिस’ कार्यक्रम सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खनन कार्यों के लिए रास्ता बनाने पर भी केंद्रित है। चीन भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस ‘चंद्र दौड़’ में निजी कंपनियाँ चंद्रमा के संसाधनों को कैसे निकाला जाए, इस पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। “चांद पर सोने से भी महंगा पानी है। चंद्रमा पर पानी की बर्फ को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बदलकर अंतरिक्ष यान में ईंधन भरा जा सकता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रा आसान हो सकती है।” चंद्रमा पर खनन से पृथ्वी के घटते खनिजों पर दबाव भी कम हो सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया नए पर्यावरणीय और भौतिक संकटों को

जन्म दे सकती है, जैसे चंद्रमा की सतह पर धूल का प्रबंधन। चंद्रमा पर खनन का मुद्दा केवल खनिजों तक सीमित नहीं है। यह बाहरी अंतरिक्ष संधि, आर्टेमिस समझौते और अंतरिक्ष में स्वामित्व के अधिकारों से भी जुड़ा है। चांद के संसाधनों को मानवता की साझा विरासत माना जाता है, लेकिन क्या यह वाणिज्यिक खनन को चुनौती देगा? इससे जुड़ी कानूनी और सामाजिक चुनौतियाँ भी हैं, जैसे चांद पर खनिकों का जीवन। भारी कामकाजी घंटों, जलवायु और सुरक्षा संकटों का सामना करने के बावजूद, क्या चांद पर खनन से जुड़े कार्यकर्ताओं को उचित कार्य परिस्थितियाँ मिल पाएंगी? इस भविष्य को लेकर सवाल अभी भी बहुत हैं। क्या चंद्रमा पर खनन से पृथ्वी और अंतरिक्ष दोनों के लिए नए अवसर पैदा होंगे? केवल समय ही बताएगा।