हजारीबाग के करिआतपुर निवासी सामाजिक चिंतक, पर्यावरण संरक्षक और शिक्षाविद् जीतेश्वर मेहता उर्फ बिरजू मेहता का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन कर दिया गया। उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा स्थानीय लोग शामिल हुए और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। बिरजू मेहता पर्यावरण संरक्षण, पिछड़े वर्गों के अधिकारों के प्रति जागरूकता और अंधविश्वास के खिलाफ अपने अभियान

के लिए जाने जाते थे। उन्होंने छबेलवा जंगल संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। अंतिम विदाई के दौरान उपस्थित लोगों ने उनके वैचारिक सोच को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। बैठक में मृत्यु भोज और अनावश्यक कर्मकांड जैसी परंपराओं को समाप्त करने पर भी सहमति बनी। श्रद्धांजलि सभा के बाद श्मशान घाट परिसर में पीपल और बरगद के पौधे लगाए गए। साथ ही उनके योगदान को स्मरणीय बनाने के लिए उनके विद्यालय के आसपास उनके नाम पर एक पुस्तकालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

