सीएसआईआर-सीआईएमएफआर में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन |

सीएसआईआर-सीआईएमएफआर में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन |

धनबाद, 5 जून 2026: सीएसआईआर-केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआईएमएफआर), धनबाद में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ से पहले संस्थान परिसर में पौधारोपण से हुआ, इस अवसर पर मुख्य अतिथि, सिंफर निदेशक एवं सिंफर विज्ञानियों द्वारा 100 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री मनोज कुमार अग्रवाल तथा विशिष्ट वक्ता राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), रायपुर के प्रोफेसर समीर बाजपेयी थे।

स्वागत संबोधन में सीएसआईआर-सीआईएमएफआर के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं की समीक्षा करने का दिन है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, प्लास्टिक प्रदूषण तथा सूक्ष्म प्लास्टिक जैसी वैश्विक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए वैज्ञानिक समुदाय से अनुसंधान एवं तकनीकी विकास के दौरान पर्यावरणीय स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर ऐसे कदम उठाने चाहिए जो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करें।

मुख्य अतिथि श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि प्रकृति केवल हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि बीसीसीएल “Responsible Mining is Sustainable Mining” की अवधारणा पर कार्य कर रहा है तथा व्यापक वृक्षारोपण, हरित पट्टी विकास, वैज्ञानिक खदान पुनर्वास, वायु गुणवत्ता प्रबंधन, जल उपचार, वर्षा जल संचयन और पर्यावरणीय अग्नि नियंत्रण जैसे अनेक उपायों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है।
कार्यक्रम के दौरान एनआईटी रायपुर के प्रो. समीर बाजपेयी ने “Inspired by Nature. For Climate. For Our Future.” विषय पर विश्व पर्यावरण दिवस व्याख्यान प्रस्तुत किया।, अपने व्याख्यान में जलवायु परिवर्तन की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2024 वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया तथा पृथ्वी का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान उत्सर्जन प्रवृत्तियाँ जारी रहीं तो इस शताब्दी के अंत तक वैश्विक तापमान में 2.5 से 4.6 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है, जिससे समुद्र स्तर में वृद्धि, प्रवाल भित्तियों का विनाश, हिमखंडों का पिघलना तथा चरम मौसमीय घटनाओं में वृद्धि जैसी गंभीर परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित निबंध लेखन, पोस्टर प्रस्तुतीकरण एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजेताओं को कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया।

धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक-जी, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर, इंजी. अमरनाथ द्वारा प्रस्तुत किया गया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
प्रस्तुत है सहयोगी संदीप दत्ता के साथ पंकज सिंहा की रिपोर्ट धनबाद से

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