रामाश्रम सत्संग मथुरा, उपकेंद्र हजारीबाग के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह के दौरान आचार्यों ने सत्संग, गुरु सेवा तथा भंडारे के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को जीवनोपयोगी संदेश दिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूज्य शिवनाथ शर्मा एवं प्रदीप कुमार शर्मा ने कहा कि आध्यात्मिक सत्संग मनुष्य के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि गुरु का सान्निध्य व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाता है तथा भंडारा केवल भोजन वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना का प्रतीक है।
अपने आशीर्वचन में पूज्य मुकुल भैया ने भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ा एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए सत्संग की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य के अंतर्मन को निर्मल बनाता है और उसे सत्य तथा सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने गुरु सेवा को आत्मिक उन्नति का सर्वोत्तम साधन बताते हुए श्रद्धालुओं से गुरु के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

इस अवसर पर पूज्य देवेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि श्रद्धा, विश्वास और समर्पण भाव से सत्संग में सहभागिता करने वाला साधक आध्यात्मिक प्रगति के साथ-साथ जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भी उन्नति प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि गुरु सेवा और सत्संग के माध्यम से व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव है तथा उसका जीवन सुख, शांति और संतोष से परिपूर्ण हो जाता है।
समारोह के दौरान बड़ी संख्या में सत्संगी भाई-बहनों ने उपस्थित होकर सत्संग का लाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन में भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण बना रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने वक्ताओं के प्रेरणादायी विचारों को आत्मसात करते हुए सत्संग एवं गुरु सेवा के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने का संकल्प लिया। समापन सत्र में पूज्य देवेंद्र कुमार चौधरी ने कार्यक्रम को सफल बनाने के निमित्त प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगे हुए सभी के प्रति आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

