विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में आयोजित तीन दिवसीय एसएलडी (विशिष्ट अधिगम अक्षमता) कार्यशाला का बुधवार को सफल समापन हो गया। यह कार्यशाला समावेशी शिक्षा और फैकल्टी क्षमता निर्माण को लेकर जेसी बोस भवन में आयोजित की गई थी, जिसमें कई तकनीकी सत्रों के माध्यम से महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं। समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो रजनी रंजन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य सभी वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने समावेशी शिक्षा को विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बताया और भारतीय दर्शन में “अंत्योदय” की अवधारणा पर जोर दिया।

अध्यक्षता करते हुए डॉ विकास कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और भविष्य में सभी के लिए बेहतर शैक्षिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने SLD के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी, जबकि अंतिम दिन प्रमाण पत्र वितरण किया गया। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

