ईसीएल के ई-ऑक्शन कोयला कारोबार को लेकर एक बार फिर कथित कोयला सिंडिकेट, अवैध वसूली और “रंगदारी टैक्स” जैसे मुद्दे सुर्खियों में आ गए हैं। कोल ट्रेडर्स और स्थानीय कारोबारियों का आरोप है कि तृणमूल शासनकाल में इस कथित सिंडिकेट का दबदबा इतना बढ़ गया था कि कारोबारियों से प्रति टन भारी रकम वसूली जाती थी। व्यापारियों का कहना है कि जो कारोबारी इस कथित रंगदारी व्यवस्था का विरोध करते थे, उनके लिए कोयला उठाव और व्यापार करना बेहद मुश्किल हो जाता था। वहीं, सिंडिकेट से जुड़े लोगों को विशेष सुविधा और संरक्षण मिलने की भी बातें सामने आ रही हैं। स्थानीय सूत्रों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि इस कथित कोयला कारोबार नेटवर्क में कुछ बड़े लोगों के निवेश और हिस्सेदारी की भी चर्चा रही है, जिनके बदले उन्हें मोटा लाभ

मिलने की बात कही जाती है। इस संदर्भ में Sourav उर्फ Golu, Satish, Pawan और Manoj जैसे नाम उस समय कथित तौर पर सिंडिकेट से जुड़े होने की चर्चा में रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो और भी कई नए चेहरे सामने आ सकते हैं। रविवार को कई कोल ट्रेडर्स ने विभिन्न साइडिंग क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। व्यापारियों का दावा है कि ई-ऑक्शन कोयला कारोबार में लंबे समय से अवैध वसूली का एक समानांतर नेटवर्क सक्रिय था, जिससे बड़े पैमाने पर काली कमाई होने की आशंका जताई जा रही है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और कारोबारी हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

