हजारीबाग के चौपारण प्रखंड के ताजपुर पंचायत के आदिवासी गांवों में आज भी लोग स्वच्छ पानी के लिए तरस रहे हैं। करंजुवा समेत कई गांवों में पेयजल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण मजबूरी में जंगलों और पहाड़ियों के बीच बने चुवां के पानी पर निर्भर हैं, जिसे जंगली जानवर भी इस्तेमाल करते हैं। इससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि आज तक न चापाकल लगा और न ही पाइपलाइन पानी

पहुंचा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द स्थायी पेयजल व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें सुरक्षित पानी मिल सके।

