उत्तर प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते बंदरों के उत्पात को लेकर राहत की उम्मीद जगी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद वन विभाग ने बंदरों के नियंत्रण और प्रबंधन के लिए व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू किया है। शासन ने वन विभाग को मुख्य नोडल एजेंसी नियुक्त किया है और समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान की मदद लेने का निर्णय लिया गया। छह अप्रैल को हाई

कोर्ट में इस विषय पर अगली सुनवाई होगी। कार्ययोजना के तहत पूरे प्रदेश में बंदरों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि किन जिलों और धार्मिक स्थलों में बंदरों की आबादी अधिक है और वे किस प्रकार का नुकसान पहुंचा रहे हैं। पकड़े गए बंदरों को रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में छोड़ा जाएगा, जहां फलदार वृक्ष पर्याप्त हों। साथ ही, वानर वन बनाने और बंदरों की नसबंदी के वैज्ञानिक तरीकों पर भी शोध किया जाएगा। अध्ययन यह भी तय करेगा कि बंदर पकड़ने में नगर निगम, पशुपालन विभाग और वन विभाग की भूमिका क्या होगी।

