सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ED कार्यालयों में हस्तक्षेप को “असामान्य” और “सुखद स्थिति नहीं” बताया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी घटनाओं में केंद्रीय एजेंसी को बिना रोक-टोक छोड़ दिया जाना चाहिए। ED का आरोप है कि 8 जनवरी को I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और ऑफिस में तलाशी के दौरान ममता बनर्जी मौजूद थीं। उनके कथित हस्तक्षेप से दस्तावेज, लैपटॉप और अन्य

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। एजेंसी ने कहा कि राज्य पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर थे और जांच में बाधा डाली। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता व्यक्त की और मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की। तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। देखना होगा कि 24 मार्च को कोर्ट इस मामले में क्या फैसला करती है।

