एनटीपीसी की विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े भूमि अधिग्रहण और मुआवजा नीति पर विधायक रोशन लाल चौधरी ने सदन में उठाए गंभीर सवाल विस्थापितों को उनका हक और अधिकार दिलाने के लिए लगातार आवाज उठाता रहूंगा –रौशन लाल चौधरी केरेडारी/बड़कागांव — बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रोशन लाल चौधरी ने झारखंड विधानसभा में एनटीपीसी की विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े भूमि अधिग्रहण,मुआवजा और पुनर्वास के मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल किए। सदन को संबोधित करते हुए विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि उनके प्रश्न के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं। पहला, एमएमडीआर एक्ट 1957 का समुचित अनुपालन नहीं होना और दूसरा RFCTLARR Act 2013 (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन अधिनियम 2013) का पालन नहीं किया जाना। उन्होंने कहा कि सरकार के उत्तर में बताया गया है कि एनटीपीसी केरेडारी, एनटीपीसी पकरी बरवाडीह तथा एनटीपीसी चट्टी बरियातू परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण CBA (A&D) एक्ट 1957 के तहत किया गया है। जबकि मुआवजा भुगतान, विस्थापन लाभ, पुनर्वास और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया झारखंड सरकार और एनटीपीसी के बीच हुए संयुक्त समझौता पत्र (संकल्प संख्या 166/रा0, दिनांक 27 फरवरी 2023) के आधार पर की जा रही है। विधायक रोशन लाल चौधरी ने सदन के माध्यम से सरकार से पूछा कि जब भूमि अधिग्रहण CBA (A&D) एक्ट 1957 के तहत किया गया है, तो मुआवजा और पुनर्वास RFCTLARR Act 2013 के प्रावधानों के अनुसार देने में कितना न्यायसंगत है।

उन्होंने यह भी पूछा कि जब भूमि अधिग्रहण किसी एक्ट के आधार पर हुआ है, तो फिर मुआवजा और रोजगार की व्यवस्था समझौता पत्र के आधार पर क्यों तय की जा रही है। विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से आगे विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि सरकार बार-बार यह कहती है कि कोई समस्या नहीं है, जबकि वास्तविकता यह है कि समस्याओं के समाधान के लिए कई समितियां गठित की गईं, अनेक बैठकें हुईं, लेकिन जमीन पर कोई समाधान नहीं निकला। आगे श्री चौधरी ने सरकार से मांग कि विस्थापितों के हितों की रक्षा करते हुए भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के मामलों में स्पष्ट एवं न्यायसंगत नीति लागू की जाए। आगे विधायक श्री चौधरी ने सदन में स्पष्ट कहा कि विस्थापितों को उनका हक और अधिकार दिलाने के लिए वे लगातार आवाज उठाते रहेंगे। इस पर मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि कमिश्नर के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है तो संबंधित विभाग द्वारा इसकी जांच कराई जाएगी और विधिवत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में विस्थापन आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है और उसके तहत भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जाएगी। साथ ही कहा कि भारत सरकार की खनन कंपनियां केंद्र सरकार के कोल बेयरिंग एरिया (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम तथा एमएमडीआर एक्ट 1957 के तहत जिन क्षेत्रों में वर्ष 2013 से पूर्व खनन कार्य प्रारंभ हुआ है, वहां पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) तथा पारदर्शिता से जुड़े नियम लागू नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 के बाद केंद्र सरकार के प्रावधानों के तहत शुरू होने वाले खनन कार्यों में यह नियम लागू होंगे।

