सिविल कोर्ट हजारीबाग में शनिवार को मामलों के त्वरित निष्पादन व पक्षकारों की सुविधा के लिए एक नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के माननीय कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमान सुजीत नारायण प्रसाद और झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री मान प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की उपस्थिति में आनलाइन माध्यम से किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकारण के निर्देशानुसार आयोजित इस नेशनल लोक अदालत में सुलह के आधार पर कुल 73 हजार 812 मामलों का निष्पादन किया गया। जिसमें कुल 32 करोड़ 37 लाख 23 हजार 258 रुपए की राशि पर सहमति बनी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनर तले आयोजित इस नेशनल लोक अदालत की अगुवाई प्रधान जिला जज रंजीत कुमार कर रहे थे। इस मौके पर कुटुंब न्यायाधीश अनुज कुमार, न्यायिक पदाधिकारी, बार संघ के पदाधिकारी, वकील, संबंधित विभाग के पदाधिकारी और भारी संख्या में पक्षकार मौजूद थे। इस मौके पर प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने कहा कि लोक अदालत एक ऐसा वैकल्पिक मंच है जिसके माध्यम से सस्ता, सरल, सुलभ न्याय उपलब्ध कराया जाता है। इसमें अल्प अवधि में मामलों का निष्पादन होता है। जिससे न्यायालय पर मामलों का बोझ कम होता है। साथ ही इसमें न तो किसी पक्षकार की जीत होती है और न ही किसी पक्षकार की हार होती है। बल्कि दोनों पक्षकारों की जीत होती है। यहां निष्पादित मामले के खिलाफ अपील में नहीं जाया जा सकता है।

इसलिए यह सबसे सटीक माध्यम है, इसे ज्यादा से ज्यादा अपनाने का प्रयास करें। कुटुंब न्यायाधीश अनुज कुमार ने भी लोक अदालत को सही प्रक्रिया बताते हुए इसे अपनाने की बात कही। उन्होंने पक्षकारों से अपील किया कि छोटे-छोटे सुलहनीय मामलों का निष्पादन आपसी सहमति के आधार पर लोक अदालत में करें। उन्होंने कहा कि साथ ही पारिवारिक मामलों के निष्पादन के लिए मध्यस्थता की प्रक्रिया को अपनाएं। इस लोक अदालत में कुटुंब न्यायाधीश के प्रयास से छह वर्षों से अलग-अलग रहे पति-पत्नी जिनका इस लोक अदालत में परिवार बस गया। उन्हें प्रधान जिला जज और कुटुंब न्यायालय ने अपनी शुभकामनाएं दी और छह वर्षीय बेटी को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम को बार संघ अध्यक्ष राजकुमार ने भी संबोधित किया। इस मौके पर जिला वन पदाधिकारी मौन प्रकाश भी मौजूद थे। मंच का संचालन न्यायिक पदाधिकारी जूही कुमारी जबकि धन्यवाद ज्ञापन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने दिया। इस नेशनल लोक अदालत में बैंक रिकवरी के 1174 मामले, सुलहनीय आपराधिक 255 मामले, बिजली के 423 मामले, भू-अर्जन के 597 मामले, श्रम विवाद से संबंधित 07 मामले, मोटर वाहन दुर्घटना दावा से संबंधित 10 मामले, वैवाहिक विवाद से संबंधित 40 मामले, सिविल प्रकृति के 17 मामले, चेक बाउंस के 153 मामले और अन्य 64 हजार 021 मामलों का निपटारा पक्षकारों की आपसी सहमति से किया गया। इसमें प्री-लिटिगेशन से संबंधित मामले भी शामिल हैं। यह जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने दी। उन्होंने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार के दिशा निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार लगातार लोगों की सुविधाओं के लिए काम कर रहा है। और इस तरह के कार्यक्रम हमेशा लगाए जाते रहेंगे। उन्होंने इस लोक अदालत में शामिल सभी न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, कोर्ट कर्मचारियों और पक्षकारों को प्रति अपना आभार जताया है।

