विभावि पीएम-उषा मेरु परियोजना को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित मेरु विश्वविद्यालय का स्टारशिप योजना बनेगा: कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा आईआईटी कानपुर से लिया जा रहा है मार्गदर्शन, स्थापित होंगे कई सेंटर-आफ-एक्सीलेंस: मेरु समन्वयक डॉ अरुण कुमार मिश्रा विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग को पीएम उषा मेरु (MERU) विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने हेतु प्राप्त 99.7 करोड़ रुपयो की परियोजना की प्रगति की समीक्षा हेतु उच्च स्तरीय बैठक शनिवार को आयोजित की गई। आर्यभट्ट सभागार में आयोजित उक्त बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने की। प्रोफेसर शर्मा ने बताया की बिहार-झारखंड का पहला और इकलौता विश्वविद्यालय विनोबा भाव विश्वविद्यालय है जिसे “मेरु विश्वविद्यालय” बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। यह विश्वविद्यालय का स्टरशिप प्रोजेक्ट बनने जा रहा है। यह हम सबको दूसरे के बच्चों के लिए बहुत कुछ करने का अवसर प्रदान करेगा। इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा। ज्ञात हो कि केंद्र सरकार द्वारा विनोबा भावे विश्वविद्यालय को ‘पीएम उषा मेरु’ परियोजना के लिए चयन किया गया है तथा इस योजना के लिए 99.7 करोड़ रुपए की राशि भी आवंटित की गई है। प्राप्त राशि को मेरु नियमावली के अनुसार खर्च किया जा रहा है। बैठक में मेरु परियोजना के समन्वयक तथा पीएम-उषा के नोडल पदाधिकारी डॉ अरुण कुमार मिश्रा पावरप्वाइंट प्रस्तुति द्वारा योजना के 44 भिन्न-भिन्न बिंदुओं के बारे में सभी को जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सामूहिक प्रयास से ही इस योजना को सफल बना सकते हैं। इसके लिए सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को इस परियोजना की बारीकियां को जानना होगा। बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से प्रत्येक वर्ष डेढ़ लाख स्नातक के विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाई जाएगी। इसके लिए मेंटर की नियुक्ति होगी। डॉ मिश्रा ने बताया की गुणवत्ता के साथ मेरु कार्यक्रम को लागू करने के लिए आईआईटी कानपुर के साथ लगातार विश्वविद्यालय का संवाद जारी है। नोडल पदाधिकारी ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत कई सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इसमें सेंटर आफ एक्सीलेंस ऑन साइबर सिक्योरिटी, सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस इन रिमोट सेंसिंग एंड जिआईएस, सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस इन सोशल साइंस तथा सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस इन अप्लाइड साइंस की स्थापना की जानी है। प्रशिक्षुता एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण (Apprenticeship and Internship) के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारुन्मुख बनाया जाएगा। महाविद्यालयों के साथ भी क्लस्टरिंग की जाएगी। भविष्य के कौशल को लेकर काम किए जाएंगे। इस योजना में संभावनाएं असीमित हैं। डॉ अरुण ने बताया कि पारंपरिक विषय-केंद्रित सोच से हटके सहयोगी थीम (Collaborative Theme) पर कार्य करने पड़ेंगे। बैठक में विश्वविद्यालय के पदाधिकारी एवं शिक्षक अच्छी संख्या में उपस्थित थे।

