बोर्ड परीक्षा तैयारी व स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष कार्यशाला |

बोर्ड परीक्षा तैयारी व स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष कार्यशाला |

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में सीबीएसई बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं परीक्षा में सम्मिलित होने वाली छात्राओं के लिए उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और सतत परिश्रम,अनुशासन एवं सकारात्मक सोच से ही बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।उन्होंने छात्राओं को नियमित अध्ययन,समय का सदुपयोग तथा निरंतर अभ्यास एवं पुनरावृत्ति पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होती है, जो उनके भविष्य की दिशा तय करती है। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए निरंतर प्रयासरत है।विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक पहल एवं विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छात्राओं की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं अभिभावकों के सहयोग से इस वर्ष जिले का परीक्षा परिणाम और बेहतर होगा।उपायुक्त ने छात्राओं को परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि वे परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पूर्व पहुंचें, शांत एवं एकाग्रचित्त होकर परीक्षा दें तथा प्रश्नपत्र को ध्यानपूर्वक पढ़कर ही उत्तर लिखें। उन्होंने परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों से दूर रहने तथा आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में सम्मिलित होने का आह्वान किया। उन्होंने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यदि किसी प्रश्न का उत्तर पूर्ण रूप से ज्ञात नहीं हो, तब भी उससे संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को अवश्य लिखें, जिससे अंक प्राप्त करने की संभावना बनी रहती है। साथ ही उत्तर पुस्तिका में स्वच्छ, स्पष्ट एवं व्यवस्थित लेखन तथा आवश्यकतानुसार आरेख एवं फ्लोचार्ट के उपयोग पर भी बल दिया।उपायुक्त ने छात्राओं को एमडीए-आईडीए अभियान के बारे में जानकारी देते हुए फाइलेरिया रोधी दवा सेवन के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन पूर्णतः रोके जाने योग्य बीमारी है। दवा का नियमित सेवन कर इस बीमारी के संक्रमण को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे स्वयं दवा का सेवन करें तथा अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

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