हजारीबाग। संत जेवियर स्कूल, हजारीबाग अपने गौरवशाली 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर को उत्साहपूर्वक मनाने की कड़ी में विद्यालय द्वारा 28 जनवरी को एक भव्य साइक्लोथन का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल विद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय रहा, बल्कि पूरे शहर में स्वास्थ्य जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश भी प्रसारित किया। साइक्लोथन का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य फादर रोसनर खलखो एस.जे. द्वारा विधिवत् रिबन काटकर, रंग-बिरंगे गुब्बारे आकाश में उड़ाकर तथा हरी झंडी दिखाकर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के उपप्रधानाचार्य, शिक्षकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, वर्तमान विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में पूर्व विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी प्रतिभागियों में अद्भुत उत्साह और ऊर्जा का संचार स्पष्ट रूप से देखा गया। यह साइक्लोथन विद्यालय के उपप्राचार्य डॉ. देवब्रत मित्रा एवं रजत नाग सर के कुशल निर्देशन में संचालित हुआ। उनके मार्गदर्शन और सुव्यवस्थित योजना के कारण पूरा कार्यक्रम अनुशासित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। साइक्लोथन को सफल बनाने में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित कर आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने में सहयोग प्रदान किया। साइक्लोथन की शुरुआत संत

जेवियर स्कूल परिसर से हुई। निर्धारित मार्ग के अनुसार यह इंद्रपुरी चौक, झंडा चौक, बंशीलाल चौक , पुराना बस स्टैंड,पी डब्लू चौक और पीटीसी चौक से होते हुए पुनः विद्यालय परिसर में संपन्न हुआ। मार्ग के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया, जिससे आयोजन का वातावरण और भी प्रेरणादायक बन गया। इस साइक्लोथन का मुख्य उद्देश्य मानवीय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित करना था। बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच साइकिल चलाने जैसे सरल और पर्यावरण–अनुकूल साधन को अपनाने का संदेश इस आयोजन के माध्यम से प्रभावी रूप से दिया गया। विद्यालय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि स्वस्थ शरीर और स्वच्छ पर्यावरण ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में अनुशासन, एकजुटता और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। 75वें वर्ष में प्रवेश के इस विशेष अवसर पर आयोजित यह साइक्लोथन विद्यालय के इतिहास में एक प्रेरक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। यह आयोजन न केवल उत्सव का प्रतीक था, बल्कि समाज के प्रति विद्यालय की जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

