रीक्षा परिणाम में सुधार हेतु लिखित नोटिस जारी करने एवं अन्य मांगों के पूर्ति हेतु आश्वासन के बाद महाविद्यालय प्राचार्य के हाथों जूस पीकर कार्यकर्ताओं ने तोड़ा अनशन। महाविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, शैक्षणिक सत्रों के विलंब और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का प्रचंड जनांदोलन अंततः छात्र शक्ति की विजय के साथ संपन्न हुआ। 21 जनवरी सुबह 11:00 बजे से शुरू हुई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ने दूसरे दिन दोपहर तक कॉलेज प्रशासन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। कड़ाके की ठंड में रात भर महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर डटे कार्यकर्ताओं के हौसले के आगे प्रशासन की हर रणनीति विफल साबित हुई। आंदोलन का नेतृत्व कॉलेज अध्यक्ष दुलाल चंद्र दास ने किया, जिसमें जिला संयोजक सुमित पांडे, कॉलेज उपाध्यक्ष सुमित सेन, नगर सह मंत्री रॉकी दास, नगर जनजाति कार्य प्रमुख चंदन पहाड़िया, दिनेश मुर्मू, संतोष तुरी, आर्यन कुमार, कैलाश शाह, रोशन शाह, प्रीतम कुमार भगत, अफराज अहमद, राकेश प्रमाणिक, सुलभ दास, रंजीत रॉय, सफीउल्ला शेख, अरबाज अंसारी एवं राकेश कुमार जैसे कार्यकर्ताओं ने पूरी रात मोर्चा संभाला। सुबह होते ही यह आंदोलन जनसैलाब में बदल गया और सैकड़ों की संख्या में छात्र छात्राओं ने अपनी आवाज बुलंद की।

आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने फोन पर प्रदेश सह मंत्री बमभोला उपाध्याय से लंबी वार्ता की। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. युगल झा और अन्य प्राध्यापकों ने सुबह दो बार कार्यकर्ताओं को मनाने और मौखिक आश्वासन देने की कोशिश की, लेकिन विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अडिग रहे और बिना किसी आधिकारिक लिखित नोटिस के हटने से साफ इनकार कर दिया। अंततः दोपहर 2:00 बजे प्राचार्य को झुकना पड़ा और उन्होंने सेमेस्टर-4 के छात्रों के परीक्षा परिणाम में हुई त्रुटि को सुधारने की पूर्ण जिम्मेदारी कॉलेज स्तर पर लेने का आधिकारिक नोटिस जारी किया। साथ ही, अगले 10 दिनों के भीतर पेयजल, शौचालय, वाई-फाई और ट्यूशन फी के बदले मिलने वाली सुविधाओं को बहाल करने का संकल्प लिया। इसके अलावा, बीएड की मान्यता और प्रशासनिक भवन व मल्टीपर्पज हॉल के निर्माण में करोड़ों के भ्रष्टाचार की जांच के लिए विश्वविद्यालय को अविलंब पत्राचार किया गया।प्रदेश सह मंत्री बमभोला उपाध्याय ने कहा कि कुछ लोग मर्यादा लांघकर कार्यकर्ताओं को आंदोलन खत्म करने की धमकी दे रहे थे, लेकिन एबीवीपी किसी के भय से झुकने वाली नहीं है। हम छात्र हितों के लिए हर छल प्रपंच का जवाब ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह तो केवल आगाज है। उन्होंने इस लड़ाई में जिले के मीडिया का विशेष रूप से धन्यवाद दिया। श्री उपाध्याय ने बताया कि परिषद की अगली लड़ाई डीपीएस बीएड कॉलेज में मनमाने शुल्क और नामांकन में पारदर्शिता के अभाव के खिलाफ होगी। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. युगल झा और प्रधान लिपिक नीरज कुमार ने कॉलेज अध्यक्ष दुलाल चंद्र दास और प्रदेश सह मंत्री बमभोला उपाध्याय को अपने हाथों से जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाया।

