डिजिटल भारत की दिशा में बड़ा कदम: ‘मेरा गांव–मेरी धरोहर’ पहल

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में संचालित राष्ट्रीय अभियान ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ के प्रभावी क्रियान्वयन एवं शत प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पंचायती राज विभाग, झारखंड सरकार के निदेशानुसार रविन्द्र भवन में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ उपायुक्त मनीष कुमार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर डीपीएम आनंद प्रकाश, बीपीआरओ, प्रखंड समन्वयक, पंचायत सचिव, पंचायत सहायक एवं वीएलई उपस्थित रहे।उपायुक्त ने कहा कि भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है। हर गांव अपने भीतर इतिहास, परंपरा, लोककला और संस्कृति की अनमोल धरोहर समेटे हुए है। ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ पहल इन विरासतों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर न केवल संरक्षित करेगी, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान भी दिलाएगी। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिव, सहायक एवं वीएलई इस अभियान की रीढ़ हैं। इनके माध्यम से ही गांवों की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पोर्टल पर सटीक, प्रमाणिक एवं प्रभावी रूप से दर्ज किया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि पंचायत पुरस्कार एवं अन्य राष्ट्रीय सम्मानों के लिए केवल अच्छे कार्य ही नहीं, बल्कि समय पर सटीक डेटा एंट्री भी अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को ‘मेरा गांव-मेरा धरोहर’ पहल के उद्देश्यों, डिजिटल सशक्तिकरण, नवाचार, सुशासन,

पंचायत स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जनसेवा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई।उपायुक्त ने सभी पंचायत सचिवों, पंचायत सहायकों एवं वीएलई से निष्ठा, नवाचार, समर्पण एवं टीम भावना के साथ कार्य करते हुए जिले के सर्वांगीण विकास में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।प्रशिक्षण सत्र को व्यावहारिक एवं तकनीकी रूप से समृद्ध बनाया गया। प्रभारी जिला परियोजना प्रबंधक ने सांस्कृतिक मानचित्रण की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि ग्राम स्तर पर पारिस्थितिक, स्थापत्य, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं विकासात्मक धरोहरों की पहचान कर उनका तथ्यपरक दस्तावेजीकरण किया जाना है। प्रखंड समन्वयक ने फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियों एवं उनके समाधान पर प्रकाश डालते हुए टीमवर्क और समन्वय को सफलता की कुंजी बताया।नीति आयोग के एबीएफ ने मोबाइल एप्लिकेशन, जियो- टैगिंग, फोटो एवं वीडियो अपलोडिंग की प्रक्रिया को पीपीटी एवं वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से विस्तार से समझाया।कार्यशाला के द्वितीय सत्र में मुख्यमंत्री उत्कृष्ट पंचायत पुरस्कार को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई। ऑनलाइन प्रविष्टि, मूल्यांकन मापदंड, साक्ष्य अपलोडिंग एवं पारदर्शी शासन व्यवस्था से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा की गई। उपायुक्त ने सभी पंचायतों से इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों की तकनीकी शंकाओं का समाधान किया गया, जिससे प्रशिक्षण को और अधिक उपयोगी बनाया जा सके।

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