भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को जीवंत करने वाला ऐतिहासिक क्षण आज देखने को मिला, जब 2000 साल पुरानी तकनीक से बना जहाज INSV कौंडिन्य गुजरात के पोरबंदर से ओमान के लिए रवाना हुआ। इस विशेष जहाज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न तो इंजन है, न GPS और न ही किसी तरह की लोहे की कील का इस्तेमाल किया गया है। लकड़ी के तख्तों को नारियल की रस्सियों से सिलकर बनाया गया यह जहाज पूरी तरह हवा के सहारे चलेगा। INSV कौंडिन्य का डिज़ाइन अजंता की गुफाओं में बनी 5वीं सदी की पेंटिंग्स से प्रेरित है। जहाज में चौकोर कॉटन सेल और पैडल लगाए गए हैं।

करीब 1400 किलोमीटर की यह समुद्री यात्रा 15 दिनों में पूरी की जाएगी, जिसमें 13 नाविक और 3 अधिकारी सवार हैं। भारतीय नौसेना के वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग कृष्णा स्वामीनाथन ने जहाज को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह परियोजना भारत की प्राचीन जहाज निर्माण कला और समुद्री व्यापार इतिहास को दुनिया के सामने लाने का प्रतीक है।

