जी हां इसी संकल्प के साथ पिछले 4 वर्षों से दोबाटांड़ के श्री श्याम मंडल के श्याम प्रेमी प्रति वर्ष 31 दिसम्बर और 1 जनवरी को श्याम प्रभु के चरणों में अपने आप को समर्पित कर समाज को अपने संस्कृति को अपनाने और पाश्चात्य संस्कृति को छोड़ने की प्रेरणा देते आ रहे हैं। इन दो दिनों में भजन कीर्तन,निशान शोभा यात्रा,और तरह तरह के उपायों से श्याम प्रभु की रिझाने का प्रयत्न करते हैं साथ ही 1 जनवरी को नया साल मानने वालों और मनाने वालों को यह शिक्षा भी देते हैं कि होटल,डिस्को,पार्टी सटी छोड़ कर यदि इस प्रकार वे नया साल की शुरुआत करते हैं तो उन्हें श्याम बाबा का आशीर्वाद भी मिलेगा और वर्ष की शुरुआत भी अच्छी होगी।

इनके प्रयास का प्रभाव ऐसी है कि मात्र 87 की संख्या से शुरू की गई इस मंडल के सदस्यों की संख्या आज 2000 से भी अधिक है। सुनिए क्या कह रहें है श्री श्याम मंडल dhobataand के श्याम प्रेमी। प्रस्तुत है सहयोगी संदीप दत्ता के साथ पंकज सिन्हा की रिपोर्ट धनबाद से।

