जिला अंतर्गत बालू की भारी किल्लत और इसके असमान वितरण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पाकुड़ जिला प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।सुरेश अग्रवाल ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि जिले के महेशपुर प्रखंड के विभिन्न बालू घाटों से बालू का उठाव निरंतर जारी है। वहां से ट्रैक्टरों और ट्रेलर गाड़ियों के माध्यम से बालू को जिले के अन्य सभी प्रखंडों में उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि पाकुड़ प्रखंड में बालू की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।सुरेश अग्रवाल ने बताया कि बालू के अभाव में सरकार की कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं और निर्माण कार्य पूरी तरह बाधित हो गए हैं।

निजी क्षेत्र में भी आम नागरिक और सभी वर्ग के लोग परेशान हैं। घर बनाने या मरम्मत जैसे कार्यों के लिए बालू नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कमी का फायदा उठाकर बालू की निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक दाम पर कालाबाजारी की जा रही है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।सामाजिक कार्यकर्ता ने जिला प्रशासन से निवेदन किया है कि इस समस्या को विशेष प्राथमिकता देते हुए संज्ञान में लिया जाए। उन्होंने मांग की है कि पाकुड़ प्रखंड में बालू की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए ताकि जनहित के कार्य सुचारू रूप से चल सकें और विकास योजनाओं में तेजी आ सके।उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बालू संकट का समाधान नहीं किया गया, तो विकास की गति और भी धीमी हो जाएगी, जिसका सीधा नुकसान जिले की जनता को उठाना पड़ेगा।

