भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शुरू किए गए उम्मीद पोर्टल (umeed.waqf.gov.in) पर देशभर की वक्फ संपत्तियों का विवरण अपलोड करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार ने 5 दिसंबर तक सभी वक्फ संपत्तियों का डेटा ऑनलाइन दर्ज कराना अनिवार्य किया है। इसी क्रम में कैमूर में बिहार स्टेट वक्फ बोर्ड की स्थानीय इकाई द्वारा सोमवार को भभुआ स्थित मुस्लिम मुसाफिर खाना में बैठक आयोजित कर वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन डेटा अपलोड का कार्य शुरू किया गया। वक्फ बोर्ड के सदस्य माशूक खान ने बताया कि विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने वक्फ कानून लागू कर दिया है और एक नागरिक होने के नाते कानून का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उम्मीद पोर्टल पर वक्फ से संबंधित सभी संपत्तियों का ब्योरा दर्ज कराना अनिवार्य है और इसी उद्देश्य से जिले में डेटा अपलोड का कार्य प्रारंभ किया गया है। किसी को असुविधा न हो, इसके लिए एक विशेष टीम मुसाफिर खाना में

तैनात की गई है। वहीं वक्फ बोर्ड कैमूर इकाई के सचिव रमज़ान अंसारी ने कहा कि देशभर में मदरसा, मस्जिद, कब्रिस्तान और मज़ार की संपत्तियों पर अवैध कब्जे की घटनाएँ बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार भी इससे अछूता नहीं है और कुछ लोग बिना प्रमाण के वक्फ संपत्तियों को घेरने या उपयोग करने से रोक लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी को देखते हुए जिले में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के लिए कैंप आयोजित किया गया है, ताकि सभी संपत्तियों को सुरक्षित किया जा सके। सरकार के निर्देशों के अनुसार, जो मुतवल्ली या कॉर्डिनेटर समय पर संपत्तियों का विवरण दर्ज नहीं कराते, उन पर छह माह की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण कराने से वक्फ की जमीनें और भवन स्थायी रूप से सुरक्षित माने जाएंगे। पंजीकरण न होने की स्थिति में संपत्ति का वक्फ दर्जा समाप्त हो जाएगा और बाद में केवल वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश पर ही पुनः पंजीकरण संभव होगा।

