महुआ विधानसभा सीट से टिकट न मिलने के बाद जदयू की प्रदेश महासचिव डॉक्टर आशमा परवीन फूट-फूट कर रो पड़ीं और अपने पद से इस्तीफा दे दिया। साल 2020 में जदयू के सिंबल पर चुनाव हारने के बाद आशमा इस बार 2025 के विधानसभा चुनाव में फिर से मैदान में थीं। लेकिन गठबंधन की वजह से महुआ सीट लोजपा (रामविलास) के खाते में चली गई, जिससे उनका सपना टूट गया।

टिकट नहीं मिलने के बाद आशमा परवीन ने पार्टी की सदस्यता छोड़ दी और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। रोते हुए उन्होंने स्थानीय जनता से अपील की और महुआ अनुमंडल कार्यालय के लिए रवाना हुईं। 2020 के चुनाव में चिराग पासवान ने जदयू के लगभग सभी कैंडिडेट के खिलाफ प्रत्याशी उतारा था। महुआ में यह रणनीति आशमा की हार का कारण बनी थी। इस बार गठबंधन के चलते टिकट कटने से उनका गुस्सा और निराशा दोनों सामने आई हैं।

