मिग-21 का आखिरी उड़ान: 63 साल बाद भारतीय वायुसेना से सेवामुक्त

मिग-21 का आखिरी उड़ान: 63 साल बाद भारतीय वायुसेना से सेवामुक्त

26 सितंबर को भारतीय वायुसेना का ऐतिहासिक मिग-21 लड़ाकू विमान 63 साल की सेवा के बाद रिटायर हो गया। इसे देश का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान माना जाता है। मिग-21 ने 1965, 1971, 1999 के युद्धों में पाकिस्तान के सामने वीरता दिखाई और हाल ही में बालाकोट स्ट्राइक में एफ-16 को भी ढेर किया। चंडीगढ़ में आयोजित अंतिम विदाई समारोह में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस जनरल अनिल चौहान, सीओएएस जनरल उपेंद्र द्विवेदी और सीएनएस एडमिरल दिनेश त्रिपाठी मौजूद रहे। रक्षा मंत्री ने कहा कि मिग-21 ने भारतीय वायुसेना की वीरता की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इसका इतिहास हमेशा प्रेरणादायी रहेगा। विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) राजीव बत्तीश ने बताया कि मिग-21 को उड़ाने वाले देश में सबसे ज्यादा लोग भारत में हैं और यह विमान युद्धक क्षमता, तेज़ हमलों और हवाई युद्ध के लिए आदर्श माना जाता था। मिग-21 की खासियतें: अधिकतम गति: 2,200 किलोमीटर प्रति घंटे (Mach 2.05) ऊँचाई: 17,500 मीटर तक उड़ान हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें छोटा लेकिन शक्तिशाली डिज़ाइन, तेज़ हमलों के लिए उपयुक्त मिग-21 ने 1965, 1971 और 1999 के युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 2019 में बालाकोट स्ट्राइक में एफ-16 को मार गिराया। 2025 में ऑपरेशन सिंदूर इसके आखिरी बड़े अभियान के रूप में दर्ज हुआ। हम 63 वर्षों की सेवा और वीरता को सलाम करते हैं—मिग-21 को अंतिम विदाई।

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