धर्म ही भारत की संस्कृति की आत्मा : प्रज्ञा प्रवाह

धर्म ही भारत की संस्कृति की आत्मा : प्रज्ञा प्रवाह

भारत की सभ्यता और संस्कृति दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। धर्म भारत की संस्कृति की मूल आत्मा है। अपने को आधुनिक दिखाने में हमलोग अपने मूल को भूल रहे हैं।हमको पश्चिमी सभ्यता के अनुकरण से बचना चाहिए। उक्त बातें प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रामाशीष सिंह जी ने कही। शनिवार को महाराणा प्रताप महाविद्यालय मोहनिया में आयोजित एकदिवसीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। स्व और भारत विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि धर्म को संविधान से परिभाषित नहीं किया जा सकता है। महात्मा गांधी ने भी राजनीति के साथ जिस धर्म को जोड़ा था उसका व्यापक अर्थ समझना जरूरी है। जब तक हम लोग भारतीय संस्कृति की व्यापकता को नहीं समझेंगे तब तक धर्म की सही व्याख्या नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता में जन्मदिन पर लोग मोमबत्ती बुझाते हैं जबकि भारतीय सभ्यता और संस्कृति के अनुसार हम लोग जन्मदिन पर दीपक जलते हैं। हमारा धर्म एवं हमारी संस्कृति अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर और असत्य से सत्य की ओर ले जाती है।

इसलिए इसको व्यापक अर्थ में समझना जरूरी है। स्व से मतलब स्वदेशी सर्वोदय एवं स्वराज है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद व महर्षि अरविंद जिक्र करते हुए धर्म का अर्थ समझाया। संगोष्ठी का विषय प्रवेश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दक्षिण बिहार के शारीरिक प्रांत प्रमुख राजन जी ने किया। इस मौके पर महाविद्यालय के पूर्व उप प्राचार्य डॉ श्याम बिहारी सिंह, अवकाश प्राप्त प्राध्यापक प्रोफेसर बच्चन सिंह ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर महात्तिम सिंह ने एवं संचालन डॉ लक्ष्मण शरण सिंह ने किया। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी के क्षेत्र पर्यावरण प्रमुख अजय जी, विभाग कार्यालय प्रमुख जागेश्वर जी, ओम प्रकाश जी, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष जितेंद्र पांडे, मनोज जायसवाल, राणा प्रताप सिंह, दीनानाथ सिंह, काशीनाथ सिंह, रवि सिंह, संतोष सिंह कई गणमान्य लोग की उपस्थित थे। साथी महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रोफेसर दिनेश्वर कुमार सिंह, डॉ राधेश्याम सिंह, डॉ शशिकांत सिंह, डॉ जितेंद्र सिंह, डॉ गोपाल गोस्वामी, प्रो मोहम्मद मुख्तार आलम, डॉ उदय प्रताप सिंह, डॉ माया सिंह, अंगद सिंह, डॉ उदय प्रताप सिंह, डॉ बी स्वैन सहित महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। राष्ट्रगान से हुआ कार्यक्रम का समापन मोहनियां। महाराणा प्रताप महाविद्यालय में आयोजित एकदिवसीय संगोष्ठी के समापन के मौके पर राष्ट्रगान गया गया। उसके पहले भारत माता के चित्र पर अतिथियों ने माल्यार्पण किया। दीप प्रज्वलित के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। महाविद्यालय के नेशनल कैडेट कोर के प्रतिभागियों ने स्वागत गीत गाकर माहौल को काफी अच्छा बना दिया। खचाखच भरे सभागार में इस आयोजन के दौरान राष्ट्रभक्ति की भावना दिखाई दे रही थी। अपने संबोधन के दौरान मुख्य अतिथि ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता को अपने पर जोर दिया।

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