शहर को जाम मुक्त करने व यातायात व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के नाम पर वैसे तो हर दूसरे तीसरे दिन जिला प्रशासन के संबंधित विभागों की बैठक भी होती है और संबंधित मुद्दे पर दिशा निर्देश भी जारी किए जाते हैं पर विभागीय आदेश धरे के धरे रह जाते हैं और नो एंट्री के समय पत्थर व गिट्टी लदे भारी वाहन शहर के मुख्य सड़क को चिरते हुए शहर से बेखौफ होकर निकलते हैं एवं इसे प्रशासन, थाना व ट्रैफिक पुलिस मुंह बाये देखती रह जाती है। नो एंट्री के समय भारी वाहनों का शहरी क्षेत्र में प्रवेश का आलम यह है कि आम शहरी इन वाहनों से खुद को बचाने में लगी रहती है जबकि इस दौरान शहरी क्षेत्र में चलने वाले स्कूलों के वाहन व रोजमर्रा के काम से आम लोगों का सड़क पर तांता लगा रहता है। बताते चलें कि गत गुरुवार को हाटपाड़ा चौक पर एक स्कुली बच्चे की जान हाइवा के नीचे आते आते बची। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने उग्र होकर घंटे भर रास्ते को जाम कर दिया जिसे नगर थाना व ट्रैफिक पुलिस ने काफी मान मनौव्वल व मशक्कत के बाद खाली करवाया। अभी कुछ दिनों पहले ही इसी तरह के हाइवे की

चपेट में आकर मोहनपुर सोनाजोड़ी पर एक स्कुली बच्चे की जान चली गई। आमलोगों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जब प्रशासन ब्राउन शुगर, अवैध लाटरी, वाहन चेकिंग व सड़क संबंधित जागरूकता अभियान लगातार चला रहा है तो फिर नो एंट्री में भारी वाहनों के प्रवेश के मुद्दे पर सक्रिय क्यों नहीं हो पा रहा है ?? कहीं इस मामले पर प्रशासन पर कोई अघोषित दबाब तो काम नहीं कर रही है ? ऐसे ही कतिपय यक्षप्रश्न को लेकर आम शहरी अपना दिमाग खरोंचने में और भारी वाहन यातायात व्यवस्था को ठेंगा दिखाने में व्यस्त है। हांलांकि घटना के बाद नो एंट्री के समय एक भी भारी वाहन प्रवेश नहीं करते देखे गए हैं। बताते चलें कि माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश का पाकुड़ आगमन सुनिश्चित हुआ है। इस मामले पर डीएसपी मुख्यालय जितेंद्र कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है और अग्रतर कार्रवाई की जा रही है।

