हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर दिल्ली पब्लिक स्कूल के सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस पर विद्यालय के निर्देशक अरुणेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य जे.के. शर्मा तथा स्कूल के शिक्षकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्र भाषा के महत्व पर विचार विमर्श करना और शिक्षकों छात्रों में हिन्दी के प्रति सम्मान एवं गर्व की भावना जागृत करना था।कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ। विद्यालय के निदेशक अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि हिन्दी केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता की आत्मा है। उन्होंने सभी को यह प्रेरणा दी कि हिन्दी को केवल हिन्दी दिवस तक सीमित न रखकर दिनचर्या और व्यवहार में शामिल करना में चाहिए।प्रधानाचार्य जे.के शर्मा ने हिन्दी भाषा की ऐतिहासिक यात्रा व गौरव पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा 14 सितम्बर का यह पर्व अपनी भाषा के अनुराग और सम्मान को अक्षुण्ण रखने, विशालता को नए आयाम देने और आने

वाली पीढ़ियों तक उसकी विरासत को पहुँचाने हेतु प्रेरित करता है। यह दिन भारतीय अस्मिता का अलंकरण है, और हिंदी वह रत्न है जो हर जीभ पर चमकता है, हर आत्मा में गूंजता है। हिंदी विभागाध्यक्ष नेहा चक्रवर्ती ने हिंदी भाषा की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी का सम्मान करना, केवल भाषा का नहीं, बल्कि अपनी पहचान और स्वाभिमान का सम्मान करना है। हिंदी को बढ़ावा देने का अर्थ अन्य भाषाओं को छोटा करना नहीं बल्कि अपनी मात्रा भाषा को गर्व से अपनाना है। शिक्षक तापोश सरकार ने काव्यात्मक शैली में, विकास गुप्ता ने ऐतिहासिक परिवेश को रेखांकित करते हुए, सुश्री सरस्वती ने कविताओं के माध्यम से एवम् अन्य शिक्षकों ने अपने विचार संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए हिन्दी भाषा की समृद्धि, साहित्यिक धरोहर तथा वैश्विक स्तर पर इसके बढ़ते महत्व पर विस्तृत चर्चा की।

