सिर्फ़ 22 साल की उम्र में छत्तीसगढ़ के घुईटांगर गाँव से निकलकर अनिमेष कुजूर ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बटोरी हैं। पुलिस अधिकारी के बेटे अनिमेष का यह सफर – एक सुदूर आदिवासी गाँव से भारत के स्प्रिंट रिकॉर्ड तक पहुँचना – किसी असाधारण उपलब्धि से कम नहीं है। हालाँकि वे अभी उसैन बोल्ट के विश्व रिकॉर्ड और ओलंपिक स्वर्ण पदक समय से पीछे हैं, लेकिन भारत को वैश्विक स्प्रिंटिंग के रडार पर मज़बूती से स्थापित कर चुके हैं। विशेषज्ञों

का मानना है कि अगर उनका प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहा, तो वे ओलंपिक सेमीफ़ाइनल या फ़ाइनल तक पहुँचने वाले पहले भारतीय धावक बन सकते हैं। यह भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा। अनिमेष कुजूर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं — उनका जुनून और संघर्ष ही उन्हें भारत का सबसे तेज़ धावक बनाता है।

