जांच के लिए प्रत्येक जनपद में विशेष टीम बनाई जाएगी, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। टीम सभी कोर्सेज की सूची और स्वीकृति पत्र की समीक्षा करेगी। यदि कोई संस्थान बिना मान्यता वाले कोर्स चला रहा पाया गया, तो उस पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी और छात्रों को फीस ब्याज सहित लौटानी पड़ेगी।
इस जांच का असर हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका से भी जुड़ा है, जिसमें श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय में बिना मान्यता वाले लॉ कोर्स में प्रवेश पर कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित अन्य छात्र संगठनों ने भी विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन किया था।

