देवघर की धरती ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा और समर्पण की कोई सीमा नहीं होती। झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को जहां पिछड़ेपन और संसाधनों की कमी के लिए जाना जाता है, वहीं देवघर की शिक्षिका श्वेता शर्मा ने इस छवि को बदलने का काम किया है। उनका चयन नेशनल टीचर्स अवार्ड 2025 के लिए हुआ है। आगामी शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किया जाएगा। उक्त खबर की जानकारी मिलते ही राजकीयकृत विवेकानंद मध्य विद्यालय मीना बाजार का माहौल जश्न में बदल गया। बच्चे उत्साहित होकर अपनी मैम के बारे में बातें कर रहे थे।छात्रा पूनम कुमारी ने बताया कि मैडम कभी पढ़ाई का दबाव महसूस नहीं होने देतीं। वो खेल खेल में सिखाती हैं, इसलिए पढ़ाई मजेदार हो जाती है।छात्रा मिक्की ने कहा मैम कहानी सुनाते सुनाते पढ़ाती हैं। उनकी क्लास में डर नहीं बल्कि मज़ा आता है। वहीं दूसरी ओर विद्यालय के शिकक्षेतर कर्मियों ने कहा कि आज विद्यालय के लिए ऐतिहासिक दिन है।

श्वेता का सम्मान सिर्फ उनका नहीं बल्कि हम सबका है। उनकी शिक्षण पद्धति बेहद अनोखी है, जिसमें बच्चे खेल-खेल में ज्ञान अर्जित करते हैं। यह उपलब्धि अन्य शिक्षकों को भी प्रेरणा देगी।सहयोगी शिक्षिका प्रीति कुमारी ने कहा श्वेता ने साबित कर दिया है कि समर्पित शिक्षक बच्चों का भविष्य ही नहीं बल्कि समाज का चेहरा बदल सकते हैं।देवघर के जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार ने कहा कि श्वेता शर्मा बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। वह बच्चों को दबाव में नहीं, बल्कि प्रेम और उत्साह से पढ़ाती हैं। यह पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है कि देवघर जिले से एकमात्र शिक्षिका राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हो रही हैं। हम चाहेंगे कि उनकी शिक्षण पद्धति को जिले के अन्य स्कूलों में भी अपनाया जाए। हालात चाहे जैसे भी हों अगर जुनून और ईमानदारी हो तो बदलाव नामुमकिन नहीं।देवघर ने यह साबित कर दिया है कि यहां के बच्चे और शिक्षक किसी से कम नहीं।देवघर में शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग इसे देवघर की ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं।

