
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार और सभापति पर सीधा सवाल दागा – “क्या हम आतंकवादी हैं जो सदन में CISF को बुलाया गया?” खड़गे ने बताया कि उन्होंने सभी विपक्षी दलों की ओर से सभापति को पत्र लिखा है, जिसमें वेल में CISF जवानों की तैनाती पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। उन्होंने कहा – “हम जनहित के मुद्दे उठा रहे थे, लेकिन सदन में जवानों को दौड़ाया गया। क्या संसद का स्तर इतना गिर गया है?” “अगर हम पत्र लिखते हैं तो उसमें आपको दिक्कत क्यों है?” खड़गे के इस बयान से संसद में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। अब सवाल उठ रहा है – संसद बहस के लिए है या डर के लिए?

