
नागपंचमी के पावन अवसर पर उज्जैन में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। वजह है — भगवान श्री नागचन्द्रेश्वर जी के दुर्लभ दिव्य दर्शन, जो वर्ष में सिर्फ एक बार, नागपंचमी के दिन 24 घंटों के लिए होते हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित यह मंदिर सालभर बंद रहता है। यहां भगवान शिव की अनोखी प्रतिमा विराजमान है, जिनके सिर पर सर्पराज वासुकी सुशोभित हैं। यह 11वीं सदी की लकड़ी की दुर्लभ प्रतिमा है, जिसे देखने लाखों श्रद्धालु देशभर से उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि नागचन्द्रेश्वर के दर्शन से कालसर्प दोष और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। भक्त बेलपत्र, दूध और नाग के प्रतीक चढ़ाकर आशीर्वाद मांगते हैं। नागचन्द्रेश्वर जी के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन मात्र से शिवकृपा की वर्षा होती है।

