
उत्तर प्रदेश सरकार के ‘श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश 2025’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस अध्यादेश के तहत मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर की पूरी व्यवस्था अब एक सरकारी ट्रस्ट के हाथों में देने की योजना है। लेकिन मंदिर की मौजूदा प्रबंधन समिति ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि मंदिर के पास ₹400 करोड़ की कोष राशि है, फिर भी उसे मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया। अदालत ने पूछा—देशभर में अब तक कितने मंदिरों को सरकार ने विधायी तरीके से अपने अधीन लिया है? जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की—“यह दान और तीर्थ क्षेत्र का मामला है, वहां जाकर समझ आएगा।” अब अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी। देखना होगा कि मंदिर की स्वतंत्रता बरकरार रहती है या सरकार की व्यवस्था लागू होती है।

