लोयाबाद: वार्ड संख्या 7 स्थित सेन्द्रा टोला की हालत इस कदर बदहाल है कि वहां रहना किसी त्रासदी से कम नहीं है। मुख्यतः महादलित समुदाय के लोगों की बस्ती में अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी कर गुजर-बसर करते हैं, लेकिन हाल की बारिश ने उनकी परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। विशेष तौर पर साधु भुईयां और उनकी वृद्ध मां मालो देवी की स्थिति बेहद दयनीय है। उनका कच्चा मकान पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जो कभी भी गिर सकता है। मकान के भीतर बारिश का पानी भरा हुआ है, चारों ओर कीचड़ और गंदगी पसरी है। मालो देवी चलने-फिरने में असमर्थ हैं और उनके बेटे साधु उन्हें सुरक्षित स्थान पर भी नहीं ले जा पा रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासन की विफलता को उजागर करती है, बल्कि मानवीय संवेदना को भी झकझोरती है। “क्या दलित होना ही हमारा अपराध है?” स्थानीय लोगों का आरोप है कि

महादलित समुदाय की समस्याओं पर सरकार और प्रशासन की कोई नजर नहीं है। एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा, “क्या दलित होना ही हमारा सबसे बड़ा अपराध है? अगर ऐसा नहीं होता तो हमें जानवरों जैसी स्थिति में क्यों जीना पड़ता?” सरकारी योजनाओं से वंचित साधु भुईयां के पास केवल राशन कार्ड है। उन्हें अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना, **वृद्धावस्था पेंशन, **स्वास्थ्य बीमा योजना, या **शौचालय योजना जैसे किसी भी सरकारी लाभ का फायदा नहीं मिला है। मानसून के इस भीषण समय में, जहां अधिकांश लोग अपने पक्के घरों में सुरक्षित हैं, वहीं यह परिवार खुले आसमान के नीचे जान जोखिम में डालकर जीवन जी रहा है।

