केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाषाई सम्मान को लेकर एक मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हमें किसी भाषा या विदेशी भाषा का विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन हमें अपनी मातृभाषा के गौरव का आग्रह ज़रूर करना चाहिए।” अमित शाह ने कहा कि गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने के लिए सबसे पहला कदम अपनी भाषा में सोचने, बोलने और उस पर गर्व करने का होना चाहिए।

उन्होंने साफ कहा कि जब तक व्यक्ति अपनी ही भाषा में सहज नहीं होगा और उसी में संवाद नहीं करेगा, तब तक वह मानसिक गुलामी से मुक्त नहीं हो सकता। उनके इस बयान को भाषाई अस्मिता और सांस्कृतिक स्वाभिमान से जोड़कर देखा जा रहा है। गृह मंत्री ने यह बात ऐसे समय पर कही है जब देश में भाषा को लेकर बहस लगातार जारी है। उनका यह वक्तव्य मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करता है और युवाओं को अपनी भाषायी पहचान पर गर्व करने का संदेश देता है।

