
देश में भाषा को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बयान एक नई बहस छेड़ गया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा — “ऐसा समाज बनेगा जहां अंग्रेज़ी बोलने वालों को शर्म आएगी, और भारतीय भाषाओं को सम्मान मिलेगा।” अमित शाह ने कहा कि आज भी कई लोग अंग्रेज़ी को श्रेष्ठ समझते हैं, लेकिन हमें ऐसी शिक्षा और संस्कृति बनानी होगी जहां मातृभाषा को गर्व और अंग्रेज़ी को औजार की तरह देखा जाए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नई शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, वहीं कुछ वर्ग इसे हिंदी थोपने की कोशिश भी बता रहे हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक अब बहस तेज हो गई है — क्या वाकई अंग्रेज़ी से दूरी बनानी चाहिए, या उसे बराबरी देनी चाहिए?

