
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साइप्रस में जोरदार और भव्य स्वागत हुआ। राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उनका अभिनंदन किया गया। यह छोटा-सा द्वीपीय देश भले ही नक्शे में छोटा दिखे, लेकिन वैश्विक कूटनीति में इसका महत्व काफी बड़ा है। मोदी का यह दौरा सीधा-सीधा तुर्की के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर रखा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय मान्यता नहीं देता। ऐसे में भारत द्वारा साइप्रस के साथ मजबूती से खड़े होने का संकेत एक अहम रणनीतिक कदम है। मोदी की यह कूटनीतिक मौजूदगी G7 शिखर सम्मेलन में भी असर दिखा सकती है, जहां वैश्विक शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी है। इस यात्रा ने भारत की विदेश नीति को एक बार फिर मजबूती से वैश्विक मंच पर स्थापित किया है।

