
गुजरात के आणंद जिले के युवा किसान श्री कल्पेश पटेल आज देशभर के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। जब उनके पिताजी बीमार हुए, तब उन्होंने पारिवारिक ज़िम्मेदारी संभालते हुए खेती को अपनाया — और वो भी प्राकृतिक तरीके से। पिछले 5 वर्षों से वे 2 एकड़ जमीन पर केले की प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जगह वे जीवामृत जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग करते हैं, जिससे लागत में कमी और उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। कल्पेश पटेल बताते हैं कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है और फसल की गुणवत्ता भी उच्च रहती है। उनके खेतों की उपज स्थानीय बाजार में बेहतर दामों पर बिक रही है। कल्पेश की यह यात्रा बताती है कि यदि युवा वैज्ञानिक सोच के साथ खेती में उतरें, तो आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों लाभ संभव हैं।

