प्रख्यात समाजसेवी लुत्फुल हक़ ने गरीबों के साथ मनाई बकरीद पिछले दो वर्षों से प्रतिदिन स्टेशन परिसर में दो सौ से ज्यादा लोगों को निशुल्क भोजन कराने वाले लुत्फुल हक़ ने बकरीद की रात स्वयं गरीबों की थाली में ना केवल भोजन परोसा बल्कि स्वयं भी भोजन का लुत्फ उठाया। खुशी के इस पल में लुत्फुल ने गरीबों की थाली में मटन,मिठाई, खीर,शाकाहारियों के लिए मिक्स भेजटेबुल रोज की खाने की मेन्यू के अलावे परोसा। हँलांकि हर दिन खाने की शुद्धता और अलग मेन्यू का खयाल रखा जाता है, लेकिन त्यौहार चाहे कोई भी हो उसके अनुसार भोजन की भिन्नता और खास व्यंजनों का खयाल रखा जाता है।उनका मानना है कि त्यौहार किसी मजहब का नहीं होता,बल्कि पूरे समाज का होता है। सिर्फ ईद या बक़रीद में नहीं बल्कि लुत्फुल हक़ रोज बाँटने वाले भोजन में होली, दुर्गापूजा और दीवाली के साथ साथ अन्य त्यौहारों का भी खाना तैयार करवाते हैं।

इन विशेष मौकों पर वे स्वयं भी उपस्थित रह खाना परोसते हैं और साथ ही खाते हैं। यही बात उनके समाजसेवा को असाधारण बनाता है।उनकी मानवीय संवेदनाओं की झलक हर शाम को पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर खाना खा रहे सैकड़ों गरीबों के चेहरों के चेहरे पर दिख जाएंगी। बताते चलें कि लुत्फ़ल हक के सौजन्य से रेलवे स्टेशन पर पिछले दो सालों से संध्या का भोजन मुफ्त में परोसी जाती है। लुत्फ़ल हक ने बताया की पाकुड़ एक छोटा शहर है जहां दूर दराज से लोग आते हैं एवं व्यक्ति को भोजन नहीं मिल पाता है इसी उद्देश्य से निःशुल्क भोजन की व्यवस्था कराई गई है।

