हजारीबाग की ऐतिहासिक और विश्वविख्यात रामनवमी की भव्यता को बरकरार रखते हुए, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामनवमी से पूर्व मंगलवार को भव्य मंगला जुलूस निकाला गया। यह जुलूस श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक है, जो मुख्य रामनवमी जुलूस के पहले नगर में धार्मिक वातावरण बनाने का कार्य करता है। इसी क्रम में इस वर्ष का दूसरा मंगला जुलूस भी पूरे उत्साह और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस बार के मंगला जुलूस में आधा दर्जन से अधिक अखाड़ों और क्लबों ने भाग लिया, जिन्होंने अपनी विशेष प्रस्तुतियों और धार्मिक जोश के साथ श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। रामभक्तों की अपार भीड़, ढोल-नगाड़ों की गूंज, भगवा ध्वजों की लहर और “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोष ने संपूर्ण हजारीबाग को राममय कर दिया। जुलूस में नवयुवकों ने परंपरागत तरीकों से भाग लिया – कुछ ने लाठी, तलवार और भाला चलाने का प्रदर्शन किया, तो कुछ ने अपनी भक्ति और श्रद्धा के साथ पूरे मार्ग पर रामध्वज लहराते हुए माहौल को भक्तिमय बना दिया। शहर की गलियों और सड़कों पर आस्था और ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने बढ़ाया रामभक्तों का उत्साह इस बार के मंगला जुलूस में हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने जुलूस में सम्मिलित होकर रामभक्तों के उत्साह को और अधिक बढ़ाया। पूरे मार्ग में वे श्रद्धालुओं से मिलते रहे, उनका

अभिनंदन करते रहे सबसे विशेष बात यह रही कि प्रदीप प्रसाद ने स्वयं लाठी भांजी और लाठी चलाने का अद्भुत करतब दिखाया। उनकी इस प्रस्तुति ने अखाड़ों के प्रतिभागियों में नया जोश भर दिया और श्रद्धालु जय श्रीराम के नारों से वातावरण को गुंजायमान करने लगे। उनकी इस सहभागिता को देखकर श्रद्धालु रोमांचित हो उठे और उनका स्वागत किया। सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं और नगरवासियों से अपील की हजारीबाग की ऐतिहासिक रामनवमी की सामाजिक विरासत को अक्षुण्ण रखा जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने सभी धर्मप्रेमियों से आग्रह किया कि इस आयोजन को सौहार्दपूर्ण तरीके से, परस्पर प्रेम और भाईचारे के साथ मनाया जाए, ताकि हमारी इस ऐतिहासिक परंपरा की गरिमा बनी रहे। जुलूस के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा। जुलूस मार्ग पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और सभी श्रद्धालु निर्भीक होकर इस धार्मिक आयोजन का आनंद उठा सकें। पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारी पूरे मार्ग पर नजर बनाए हुए थे, जिससे जुलूस शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।