गोमो केशलपुर में आयोजित बाहा बोंगा महोत्सव झारखंड और आसपास के आदिवासी समुदायों का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो प्रकृति के प्रति उनकी गहरी आस्था और श्रद्धा को दर्शाता है। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य नए पत्तों, फलों और फूलों की उत्पत्ति की खुशी मनाना और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना होता है। यह पूरे माहौल को जैसे संथाली संस्कृति के रंग में रंग गया। किशोरियों और महिलाओं के कदमों की थिरकन और पुरुषों के जोशीले नृत्य ने समां बांध दिया। आदिवासी संस्कृति की खुशबू से सराबोर इस उत्सव में हर कोई झूम उठा। केशलपुर के ही हेमंत सोरेन ने पूरे गर्व से

कहा, “यह सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति को धन्यवाद देने की परंपरा है, जिससे हर साल हरियाली बनी रहे!” और सच में, इस महोत्सव ने साबित कर दिया कि परंपराएं जितनी पुरानी होती हैं, उतनी ही ताजगी और जोश से मनाई जाती हैं। इस अवसर पर मांझी हाडम अरुण सोरेन, रोहन मांझी, उमेश सोरेन, तोला चंद सोरेन और गणेश किस्कू , दिनेश सोरेन, राजेश किस्कू सावता सुसरिय जैसे कई गणमान्य लोग मौजूद थे, जिन्होंने इस आयोजन को और भव्य बना दिया।