अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में बस्ता कोला स्थित गायत्री शक्ति पीठ में चल रहे 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के तीसरे दिन, हवन और यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने दीक्षा संस्कार भी कराए। दिनांक 18.03.2025 को हवन यज्ञ का आयोजन मुख्य अतिथि U.L Das एवं उनकी धर्म पत्नी माँ गायत्री के पूजन के साथ हुआ। साथ ही वेद मूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्री राम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा का भी पूजन हुआ। सभी कार्यक्रम गुरु जी और माता जी के सूक्ष्म संरक्षण में संपन्न हो रहे हैं। शांति कुंज से पधारे टोली नायक ने अपने संबोधन में कहा कि अच्छा जीवन जीना भी ईश्वर भक्ति का हिस्सा है। संस्कार में जो कुछ श्रेष्ठ और उत्तम है, उसका सीधा संबंध परमात्मा से है। निचले और निम्नतम कार्यों का परमात्मा से कोई संबंध नहीं

है। उन्मत्त प्रेम करना, उन्मत्त को अपनाना और अपने जीवन में श्रेष्ठता और ईश्वर के संपर्क को ही सर्वोत्तम उपासना और भक्ति माना जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य संस्कार का सर्वोत्तम प्राणी है, क्योंकि उसका हमेशा परमात्मा से गहरा संबंध होता है। जब मनुष्य परमात्मा की खोज करता है और उनसे संपर्क स्थापित करता है, तो परमात्मा उसे अपना ज्ञान, शक्ति, गरिमा और धर्म प्रदान करते हैं। यही कारण है कि मनुष्य विद्वान, वैज्ञानिक और अमरत्व के लिए श्रेष्ठ सहयोग प्रदान कर सकता है। इस दिन 5 पाली हवन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह जानकारी भूपेंद्र शर्मा अधिवक्ता ने दी।