खबर कैमूर से आ रही है जहां कैमूर पहाड़ी के रामपुर प्रखंड के बाराडीह गांव में जंगल में सूखा लकड़ी चुनने गई दलित समुदाय (मुशहर जाती ) की दो महिलाओं के साथ वन विभाग के सिपाहियों ने छेड़खानी करने का किया प्रयास विरोध करने पर पिटाई किया व ग्रामीणों के घर में घुस कर की मारपीट, बता दे कि पूरा मामला कैमूर का है जहां ग्रामीण दलित महिलाये (मुशहर जाती)का आरोप है कि हम लोग जंगल में सूखी लकड़ी बिन रहे थे तभी हम लोगों से वन विभाग के सिपाही जंगल में ही हमारी साड़ी खींचने लगे (छेड़खानी) तब हम लोग वहां से भाग कर अपने गांव आए और हमारे पीछे वन विभाग के सिपाही भी आ गए और हमारे घर में घुसकर हम लोगों के साथ मारपीट करने लगे , वही ग्रामीणों का कहना है कि हम लोग खाना बनाने के लिए जंगल में सूखी लकड़ी बिनने जाते हैं ताकि हमारे घर में खाना बन सके लेकिन वन विभाग की सिपाहियों ने हम लोगों के साथ मारपीट किया और हमारे महिलाओं के साथ छेड़खानी किया हम लोग प्रशासन से मांग करते हैं कि उन लोगों पर जल्द से जल्द कार्रवाई हो , थाने में जाने के बाद भी उन लोगों पर पुलिस के द्वारा अभी तक FIR दर्ज नहीं किया गया है । वही इस पूरे घटना पर जिला परिषद सदस्य सह बसपा नेता विकास सिंह उर्फ लल्लू

पटेल ने बताया कि गांव से दो दलित महिलाएं जंगल में सूखी लकड़ी बिनने गई थी तभी मुकेश और नीतीश नाम के दो सिपाहियों ने इन लोगों के साथ मारपीट किया और साड़ी भी खींचने का काम किया जो एक अपराध है हम लोग जिला प्रशासन से मांग करते हैं कि ऐसे सिपाही पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए । वही इस पूरे मामले पर कैमूर डीएफओ चंचल प्रकाश ने बताया कि हम लोग जंगल में वन विभाग की सिपाहियों के द्वारा पेट्रोलिंग कराते हैं ताकि कोई भी आदमी लकड़ी ना काट सके यह लोग उस दिन लकड़ी काट रही थी तभी वन विभाग की सिपाहियों के द्वारा इन लोगों को लकड़ी काटने से मना किया गया जिसकी आवेश में आकर इन लोगों ने ऐसे आरोप लगाए और यह आरोप पूरी तरीके से झूठा है इन लोगों के द्वारा थाना में आवेदन भी दिया गया था लेकिन पुलिस के द्वारा जांच में ऐसी कोई बात नहीं आई इस वजह से FIR दर्ज नहीं की गई है