अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, विनोबा भावे विश्वविद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकारों और उनकी संवैधानिक सुरक्षा पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश आदरणीय श्री रणजीत कुमार थे, जिन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संविधान में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा हेतु बनाए गए विशेष अधिनियमों और विधि क्लीनिक की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विधि क्लीनिक (Legal Clinic) समाज के वंचित तबकों, विशेष रूप से महिलाओं को न्याय दिलाने में एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। उन्होंने विभिन्न कानूनी प्रावधानों, घरेलू हिंसा अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम, दहेज निषेध अधिनियम, और संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. रश्मि प्रधान ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक संवैधानिक कर्तव्य भी है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा, कानूनी जागरूकता और न्यायिक पहुंच के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर विभिन्न

छात्रों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। छात्रा सदफ ने “महिला सशक्तिकरण” विषय पर एक प्रेरणादायक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और समाज में अपनी पहचान स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन आदिति और अंकुर सिंह ने प्रभावशाली ढंग से किया। अतिथि शिक्षक भैया मुकेश कुमार ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा किए और महिलाओं के कानूनी अधिकारों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। भारत कुमार मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस कार्यक्रम में कई संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों, विधिक जागरूकता, और उनके समाज में सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर विमर्श करना था। कार्यक्रम के अंत में महिला अधिकारों की रक्षा हेतु विधिक शिक्षा के महत्व को दोहराते हुए, सभी को महिलाओं की सुरक्षा और समानता के लिए सतत प्रयास करने का संकल्प ले रहे