सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बाबू गांव कोर्रा में हर्ष के साथ सिक्खों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह की जयंती मनाई गई। विद्यालय के पूर्व आचार्य मिथिलेश कुमार एवं प्रधानाचार्य मनोज कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्ज्लन कर एवं भारत माता, ओम, सरस्वती माता तथा गुरु गोविंद सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। अपने संबोधन में पूर्वाचार्य मिथिलेश कुमार ने भैया -बहनों को कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने अपनी जाति, धर्म एवं देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछवर कर दिया। उस समय भारत में अत्याचारी मुगलों का शासन था। मुगलों द्वारा हिंदुओं पर अत्याचार पूर्वक दबाव डालकर धर्म परिवर्तन के लिए विवश किया जा रहा था लेकिन गुरु गोविंद सिंह ने अपने धर्म, जाति एवं देश की रक्षा करने के लिए खालसा पंथ की स्थापना की और प्रत्येक सिक्खों को केश, कंघा, कड़ा, कृपाण और कच्छा रखना अनिवार्य कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि उनके पुत्रों ने भी अपने

पिता का अनुसरण करते हुए अपने जाति और धर्म की रक्षा करने के लिए दीवार में चुनवा लेना स्वीकार कर लिया लेकिन मुगलों के सामने नहीं झुके और अपना बलिदान दे दिया। विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज कुमार ने कहा कि उनकी जीवन से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि चाहे जो कुछ भी हो जाए हम अपनी जाति, धर्म तथा देश के लिए सब कुछ कुर्बान कर देना चाहिए। जिससे हमारा नाम इतिहास की पन्नों में सदा के लिए अमर हो जाएं। हमें गुरु गोविंद सिंह से प्रेरणा लेकर उनके आदर्श पर चलना चाहिए और अपने देश की रक्षा के लिए कुर्बानी देने के लिए हमेशा तैयार रखना चाहिए। इस कार्यक्रम में विद्यालय के आचार्य, दीदीजी,कर्मचारीगण एवं भैया भाई उपस्थित थे।