108 सफाईकर्मियों की बहाली पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग |

108 सफाईकर्मियों की बहाली पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग |

सफाईकर्मियों की मजदूरी अटकी, 108 नियुक्तियों पर भी सवाल; नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर श्रमिक संगठन ने खोला मोर्चा 15 दिनों के काम का भुगतान नहीं होने का आरोप, बिना बोर्ड प्रस्ताव बहाली और डिफॉल्टर एजेंसी को काम सौंपने पर उच्चस्तरीय जांच की मांग हजारीबाग। हजारीबाग नगर निगम की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले सफाईकर्मी खुद अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बकाया मजदूरी से लेकर 108 कर्मियों की नियुक्ति और ठेका एजेंसी की कार्यप्रणाली तक कई मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय मजदूर संगठन ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। संगठन ने पूरे मामले में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त से हस्तक्षेप कर उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सह हजारीबाग नगर निगम यूनियन के अध्यक्ष अधिवक्ता विवेक वाल्मीकि ने 10 अक्टूबर 2026 को प्रमंडलीय आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपकर नगर निगम में श्रमिकों के साथ हो रही अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। शिकायत में कहा गया है कि शहरी श्रमिक योजना के तहत सफाई कार्य के लिए 15 दिनों तक काम लेने के बावजूद संबंधित मजदूरों को अब तक भुगतान नहीं किया गया है।

संगठन ने इसे मजदूरी भुगतान संबंधी नियमों का उल्लंघन बताते हुए बकाया राशि के साथ विलंब मुआवजा देने की मांग की है। मामले का दूसरा अहम पहलू नगर निगम में 108 सफाईकर्मियों की बहाली से जुड़ा है। संगठन का आरोप है कि बिना सार्वजनिक सूचना, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और विधिवत बोर्ड प्रस्ताव के प्रति वार्ड तीन-तीन कर्मियों की नियुक्ति की गई। इस प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर और संवैधानिक प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में डिफॉल्टर ठेका एजेंसी को दोबारा काम सौंपे जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन का कहना है कि संबंधित एजेंसी के कर्मचारियों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी और ईपीएफ-ईएसआईसी जैसी अनिवार्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में एजेंसी को फिर से 108 कर्मियों की जिम्मेदारी सौंपना वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की आशंका पैदा करता है। इस मामले में श्रम विभाग भी सक्रिय हुआ है। उप श्रमायुक्त कार्यालय, हजारीबाग की ओर से संबंधित एजेंसी को जांच-पड़ताल और वार्ता के लिए नोटिस जारी किया गया। दस्तावेजों के अनुसार, 15 अक्टूबर को निर्धारित प्रक्रिया के बाद 30 अक्टूबर को दोबारा पत्र जारी कर सुनवाई के लिए समय निर्धारित किया गया। कार्यालय ने संबंधित पक्षों को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। निर्धारित प्रक्रिया में अनुपस्थिति की स्थिति में आगे कानूनी कार्रवाई की बात भी कही गई है। अखिल भारतीय मजदूर संगठन ने प्रमंडलीय आयुक्त से मांग की है कि सफाईकर्मियों की बकाया मजदूरी का भुगतान कराया जाए, 108 कर्मियों की बहाली प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो तथा संबंधित एजेंसी के पूर्व भुगतान और ईपीएफ रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जाए। संगठन ने जांच पूरी होने तक एजेंसी को नया काम सौंपने पर रोक लगाने की मांग की है। अब देखना होगा कि सफाईकर्मियों के बकाया भुगतान और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े इन सवालों पर नगर निगम प्रशासन क्या कदम उठाता है। फिलहाल श्रमिक संगठन ने साफ कर दिया है कि मजदूरों के अधिकारों और नियुक्ति में पारदर्शिता के मुद्दे पर वह पीछे हटने वाला नहीं है।