माँ मुंडेश्वरी का चमत्कार! जहां बिना रक्त बहाए होती है बकरे की बलि |

माँ मुंडेश्वरी का चमत्कार! जहां बिना रक्त बहाए होती है बकरे की बलि |

बिहार के कैमूर जिले की पवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर अपनी प्राचीनता और अनोखी परंपराओं के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यह मंदिर 500 ईसा पूर्व से भी अधिक पुराना है और मां ने यहीं मुंड राक्षस का वध करने के बाद मुंडेश्वरी स्वरूप धारण किया था।

करीब 600 फीट ऊंची पहाड़ी पर बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 560 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, हालांकि सड़क मार्ग की भी सुविधा उपलब्ध है। यहां की सबसे बड़ी विशेषता बकरे की रक्तहीन बलि है। श्रद्धालुओं के अनुसार, पुजारी द्वारा फूल और अक्षत अर्पित करते ही बकरा कुछ देर के लिए मूर्छित हो जाता है और दोबारा पूजा करने पर सामान्य हो जाता है। इस अनोखी परंपरा को देखने हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर में महामंडलेश्वर शिवलिंग भी स्थापित है, जिसके बारे में मान्यता है कि वह दिन में चार बार रंग बदलता है। नवरात्र और सावन के दौरान यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जहां लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।