बर्फ से ढके हिमालय के बीच बसी कश्मीर की खूबसूरत झीलें अब गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण सैकड़ों झीलें तेजी से सिकुड़ रही हैं।
कश्मीर की पहचान मानी जाने वाली डल झील का जलस्तर लगातार घट रहा है, जबकि खरपतवार, प्लास्टिक कचरा और बिना उपचार वाला सीवेज इसकी हालत और खराब कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारी रोजाना सफाई में जुटे हैं, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं।

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 1967 के बाद कश्मीर की 697 प्राकृतिक झीलों में से 315 पूरी तरह गायब हो चुकी हैं, जबकि 203 झीलों का आकार काफी छोटा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियोजित निर्माण और बढ़ते अतिक्रमण ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। इसका असर पर्यटन, मछुआरों की आजीविका और पूरे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर साफ दिखाई देने लगा है।

