Bombay High Court ने गुरुवार को Sir Ratan Tata Trust की 8 मई को प्रस्तावित बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश Alok Aradhe और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ता ने बोर्ड मीटिंग पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए अवकाशकालीन पीठ के समक्ष याचिका दायर करने की अनुमति दी। यह याचिका ठाणे निवासी सुरेश पाटिलखेड़े द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि ट्रस्ट

महाराष्ट्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम 2025 में किए गए संशोधन का उल्लंघन कर रहा है, जिसमें ‘आजीवन ट्रस्टी’ की संख्या को सीमित किया गया है। याचिका के अनुसार, ट्रस्ट में कुल छह ट्रस्टी हैं और उनमें से तीन कथित तौर पर आजीवन ट्रस्टी के रूप में कार्यरत हैं, जो तय सीमा से अधिक बताए गए हैं। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सर रतन टाटा ट्रस्ट की प्रस्तावित बोर्ड मीटिंग का रास्ता साफ हो गया है।

