महाशय विगत कल 15 अप्रैल को राज्य कैबिनेट द्वारा JTET नियमावली को पुनः वापस कर दिए जाने के फैसले के बाद झारखंड के लाखों प्रशिक्षित छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है। झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने सरकार के इस कदम को छात्रों के भविष्य के साथ क्रूर मजाक करार दिया है। छात्रों की भावना और अदालत के आदेश की अनदेखी का आरोप संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के लिए अभ्यर्थी पिछले 10 वर्षों से प्रतीक्षारत हैं। इसके लिए जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बड़े आंदोलन किए गए। माननीय उच्च न्यायालय ने भी परीक्षा आयोजन के लिए 31 मार्च तक की समय सीमा निर्धारित की थी, परंतु राज्य सरकार ने इस पर कोई ठोस पहल नहीं की। छात्र आंदोलन के भारी दबाव में सरकार ने आनन-फानन में नियमावली और पाठ्यक्रम तो जारी किया, लेकिन अब इसे कैबिनेट से वापस लेकर छात्रों को अधर में लटका दिया गया है। हजारीबाग में पुतला दहन और विरोध मार्च सरकार की नीतियों के खिलाफ आज हजारीबाग के गांधी मैदान से डिस्ट्रिक्ट मोड़ तक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री

हेमंत सोरेन, मंत्री दीपिका पांडेय और राधाकृष्ण का संयुक्त रूप से पुतला दहन किया। रविंद्र ने कहा कि सरकार और उसके मंत्री ‘भाषा’ को विवाद का विषय बनाकर जानबूझकर परीक्षाओं को रोकने की साजिश रच रहे हैं। छात्रों की मांग: राजनीति नहीं, परीक्षा चाहिए विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि जो लोग भाषा के आधार पर विवाद पैदा कर रहे हैं, वे केवल अपनी राजनीति कर रहे हैं। झारखंड के छात्र परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर परीक्षाओं का आयोजन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो सरकार राज्यव्यापी उग्र आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे। प्रमुख उपस्थिति आज के इस कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्य रूप से जीवन यादव, रविंद्र पासवान, राधे मेहता, नीरज यादव, विनय कुमार,छोटेलाल, देव कुमार, संतोष कुमार, दीपक कुमार, घनश्याम कुमार तथा धर्मेंद्र कुमार ने किया।

